उत्तर प्रदेश में 9 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा होते ही एक बार फिर से प्रदेश में सियासी पारा हाई हो गया है अभी अक्टूबर की शुरुआत दिनों में ही लखीमपुर के भाजपा विधायक योगेश वर्मा व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश सिंह के बीच शुरू हुए विवाद ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर जातिगत रंग दे दिया है
लखीमपुर में जहां एक ओर कुर्मी समाज ने विधायक योगेश वर्मा के समर्थन में बड़ी रैली का आयोजन किया वही जवाब में राजपूत करणी सेवा ने भी शस्त्र पूजन का कार्यक्रम किया
विधायक योगेश वर्मा 33 विधायकों के साथ जहां मुख्यमंत्री से मुलाकात करते हैं और उसके तुरंत बाद ही अवधेश सिंह पर मुकदमा दर्ज हो जाता है और मामला कहीं ना कहीं शांत होता दिख रहा था पर एक बार फिर से खबर यह आ गई है कि अवधेश सिंह व उनकी पत्नी पुष्पा सिंह जो की मुख्य आरोपी हैं वह बीस बीस हजार के निजी मुचलके पर रिहा हो गई है और इस खबर के निकलने के तुरंत बाद ही विधायक जी एक बार फिर से सक्रिय दिख रहे हैं और उनके तेवर पीछे हटने वाले बिल्कुल भी नहीं लग रहे हैं
इसी बीच प्रदेश में उपचुनावों को लेकर भी सरगर्मी बड़ी हुई है कटहरी फूलपुर सीसामऊ मझवा मिल्कीपुर जैसे सीटों पर कुर्मी समाज अच्छा खासा प्रभावशाली है।
सीएम योगी की जिम्मेदारी की दोनों सीटें मिल्कीपुर और कटहरी में कुर्मियों की अच्छी खासी आबादी है वह निर्णय भूमिका में रहेंगे।
कई राजनीतिक पंडितों का यह भी मानना है कि इन चुनावों के नतीजे पर सीएम साहब की कुर्सी दाव पर लगी हुई है अगर ऐसे में रोहिलखंड से लेकर पूर्वांचल बुंदेलखंड तक बड़ी आबादी रखने वाला सशक्त कुर्मी समाज अगर भाजपा के खिलाफ हुआ तो भाजपा व खासकर सीएम साहब की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है
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